नगर निगम, वाराणसी
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के प्रावधानों को लागू किये जाने हेतु 17 बिन्दुओं पर सूचना
 

बिन्दु-1 अपने संगठन की विशिष्टियां, कृत्य और कर्तव्यः-
उ0प्र0 नगर निगम अधिनियम 1959 के अन्तर्गत नगर निगम वाराणसी की स्थापना 24.01.1959 को नगर महापालिका के रूप में हुई थी एवं वर्ष 1994 में उ0प्र0 अधिनियम सं0-2 के अन्तर्गत नगर महापालिका के स्थान पर इसे नगर निगम वाराणसी के रूप में प्रतिस्थापित किया गया।
नगर निगम सीमा के अन्तर्गत नागरिकों को मूलभूत सुविधायें, नगरीय अवस्थापना सुविधाए उपलब्ध कराना एवं नागरिक स्वास्थ्य की रक्षा करना नगर निगम के मुख्य उत्तरदायित्व हैं। नगर निगम अधिनियम की धारा-114 के अन्तर्गत नगर निगम वाराणसी के 41 अनिवार्य कर्तव्य एवं धारा-115 के अन्तर्गत 43 स्वविवेकानुसार कर्तव्य निहित किया गया है।

बिन्दु-2 अपने अधिकारियों और कर्मचारियों की शक्तियां और कर्तव्यः-
निर्माण / सिविल अभियन्त्रण से सम्बन्धित कार्यों के लिए मुख्य अभियन्ता उत्तरदायी हैं, नगर में समुचित सफाई व्यवस्था एवं स्वास्थ्य व जन्म-मृत्यु पंजीयन के लिए नगर स्वास्थ्य अधिकारी, विभिन्न करों, शुल्कों, लाइसेन्स के आरोपण, संग्रहण एवं नगर निगम अभिलेखों में भवनों के नामान्तरण / दाखिल खारिज के लिए उप नगर आयुक्त एवं सहायक नगर आयुक्त (जोनल अधिकारी) उत्तरदायी हैं।

बिन्दु-3 विनिश्चय करने की प्रक्रिया में पालन की जाने वाली प्रक्रिया जिसमें पर्यवेक्षण और उत्तरदायित्व के माध्यम सम्मिलित हैः-
उ0प्र0 नगर निगम अधिनियम 1959 के अन्तर्गत नगर निगम द्वारा सम्पादित किये जाने वाले कार्यों के सम्बन्ध में निर्णय लेने हेतु विभिन्न स्तरों एवं विभिन्न वित्तीय सीमा तक नगर आयुक्त, कार्यकारिणी समिति एवं नगर निगम सदन (महापौर की अध्यक्षता में निर्वाचित पार्षदों का सदन) को सक्षम बनाया गया है। इसी प्रकार नगर निगम में सम्पादित किये जाने वाले कार्यों के पर्यवेक्षण की जवाबदेही विभिन्न स्तरों पर नगर आयुक्त से लेकर नगर निगम के विभिन्न अनुभागों के विभागाध्यक्ष तथा निचले स्तर के अधिकारी तक है। 
नगर निगम का प्रशासनिक ढाँचा निम्नवत् हैः-

नगर निगम सदन

कार्यकारिणी समिति

महापौर

नगर आयुक्त
 

नगर आयुक्त के नियत्रंण के अधीन रहते हुए अपर नगर आयुक्त, उप नगर आयुक्त तथा सहायक नगर आयुक्त नगर आयुक्त के ऐसे अधिकारों का प्रयोग तथा कर्तव्यों का पालन करते हैं जिन्हे नगर आयुक्त उ0प्र0 नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा-112(1) के अन्तर्गत निर्दिष्ट / प्रतिनिधानित करते हैं। धारा-112(2) के अन्तर्गत प्रतिनिधानित अधिकारों के अनुसरण में अपर नगर आयुक्त, उप नगर आयुक्त तथा सहायक नगर आयुक्त द्वारा सम्पादित समस्त कार्य तथा प्रयुक्त समस्त क्षेत्राधिकार सभी प्रयोजनों के लिए नगर आयुक्त द्वारा सम्पादित और प्रयुक्त समझे जाते हैं।
इसके अतिरिक्त मुख्य अभियन्ता, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, मुख्य नगर लेखा परीक्षक नगर निगम के क्रमशः सामान्य अभियन्त्रण विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा लेखा परीक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष होते हैं। 
उ0प्र0 नगर निगम अधिनियम की धारा 91(1) के अन्तर्गत नगर निगम द्वारा कराये जाने वाले निर्माण कार्य, स्वास्थ्य सम्बन्धी कार्य, मार्ग प्रकाश सम्बन्धी कार्यों के प्रस्ताव कार्यकारिणी समिति / नगर निगम के समक्ष प्रस्तुत की जाती है, जिसे विचारोपरान्त स्वीकृत किया जाता है। धारा 91(2) के अन्तर्गत पार्षदों द्वारा जो प्रस्ताव लाया जाता है, उसे भी विचारोपरान्त लिये गये निर्णय के अनुसार कार्य कराया जाता है। इसके अतिरिक्त किसी आपातकाल स्थिति में जनता की सेवा या सुरक्षा के लिए या नगर निगम की सम्पत्ति की रक्षा के लिए अधिनियम की धारा 117(6)(ख) के अधीन नगर आयुक्त को इमरजेंसी कार्य कराने के लिए अधिकृत किया गया है।

 

बिन्दु-4 अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए स्वयं द्वारा स्थापित मापमानः-
धन की उपलब्धता के आधार पर नगर निगम द्वारा पारित संकल्पों के आधार पर टेण्डर प्रक्रिया अपनाते हुए नगर निगम का कार्य संचालित किया जाता है।

 

बिन्दु-5 अपने द्वारा या अपने नियंत्रणाधीन धारित या अपने कर्मचारियों द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए प्रयोग किये गये नियम, विनियम, अनुदेश, निर्देशिका और अभिलेखः-

नगर निगम के क्रियाकलाप उ0प्र0 नगर निगम अधिनियम 1959 के अनुसार सम्पादित किये जाते हैं। इसके अतिरिक्त नगर निगम, वाराणसी में लागू नियमावलियाँ एवं उपविधियाँ उपलब्ध हैं।

 

बिन्दु-6 ऐसे दस्तावेजों के, जो उसके द्वारा धारित या उसे नियंत्रणाधीन है, प्रवर्गो का विवरणः-
वाराणसी नगर निगम के नियंत्रणाधीन कोई अभिलेखीय प्रकाशन नहीं हो रहा है।

 

बिन्दु-7 किसी व्यवस्था की विशिष्टियां जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्यवयन के सम्बन्ध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैः-
नगर निगम में स्थित 90  बोर्डों से एक-एक पार्षद एवं पूरे नगर निगम क्षेत्र से एक महापौर निर्वाचित होते हैं। इस प्रकार नगर निगम मुख्य रूप से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की ही संस्था है। निर्वाचित नगर निगम द्वारा पारित संकल्पों के अनुसार ही विकास सम्बन्धी कार्य सम्पादित किये जाते है। 
उल्लेखनीय है कि नगर निगम सीमा में निर्वाचित होने वाले सांसद एवं विधायक नगर निगम के पदेन सदस्य होते हैं। राज्य सरकार द्वारा 10 पार्षद नामित किये जाते हैं।
अधिवेशनों के समय जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर विस्तृत बहस की जाती है, बहस के उपरान्त संकल्प स्वीकृत होने की दशा में महापौर द्वारा प्रस्ताव के क्रियान्वयन हेतु प्रस्ताव नगर आयुक्त को भेजा जाता है। निगम अधिनियम के विपरीत प्रस्ताव / संकल्प पारित होने की दशा में नगर आयुक्त द्वारा प्रकरण को शासन को संदर्भित किया जाता है, शासन का आदेश अंतिम होता है।
नगर निगम वाराणसी के अध्यक्ष महापौर होते हैं, जिनके अधीन 12 पार्षदों की कार्यकारिणी समिति कार्य करते हैं। वर्ष 2007-2008 के सदन में 90 चुने हुए पार्षद कार्यरत हैं।

 

बिन्दु-8 ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के विवरण जिनमें दो या अधिक व्यक्ति है, जिनका उसके भागरूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुँच होगीः-

नगर निगम अधिनियम की धारा-51 के अन्तर्गत कार्यकारिणी समिति के गठन की व्यवस्था दी गई है जिसमें महापौर पदेन सभापति तथा चुने हुए 12 पार्षद इसके सदस्य होते हैं। कार्यकारिणी समिति अपने सदस्यों में से किसी एक को उपसभापति निर्वाचित करती है। कार्यकारिणी समिति के आधे सदस्य प्रत्येक अनुगामी वर्ष में उस महीने की पहली तारीख को, जिसमें नगर निगम का पहला अधिवेशन सम्पन्न होता है, सेवा निवृत्त हो जाते हैं।

 

बिन्दु-9 अपने अधिकारियों और कर्मचारियों की निर्देशिकाः-
नगर निगम में तैनात अधिकारियों / कर्मचारियों की अनुक्रमणिका निम्नवत हैः- 
प्रशासकीय स्तर पर प्रदेश सरकार द्वारा नगर निगम वाराणसी में नगर निगम अधिनियम की धारा-58 के तहत एक नगर आयुक्त, 01 अपर नगर आयुक्त, 01 उप नगर आयुक्त, 03 सहायक नगर आयुक्त तैनात हैं, इसके अतिरिक्त 01 मुख्य अभियन्ता, 01 अधिशासी अभियन्ता, 02 सहायक अभियन्ता, 11 अवर अभियन्ता सामान्य अभियन्त्रण विभाग में तैनात हैं। प्रान्तीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य संवर्ग के 01 मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी, 01 नगर स्वास्थ्य अधिकारी तथा 01 अपर नगर स्वास्थ्य अधिकारी तैनात हैं। वर्तमान में 07 चिकित्साधिकारी तैनात है। इसी प्रकार आन्तरिक सम्परीक्षा के लिए 02 सहायक लेखा परीक्षक तैनात है। 13 स्वास्थ्य निरीक्षक, 03 लेखाकार, 01 कर अधीक्षक न0नि0, 05 क0 अधीक्षक श्रेणी-1, 01 सहायक कर अधीक्षक, 07 राजस्व / कर निरीक्षक वर्तमान में इस नगर निगम में तैनात है।
01 अपर नगर आयुक्त, 02 अधिशासी अभियन्ता, 03 सहायक अभियन्ता, 05 अवर अभियन्ता, 02 जोनल स्वास्थ्य अधिकारी, 04 मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक, 06 स्वास्थ्य निरीक्षक, 01 लेखाधिकारी, 03 लेखा परीक्षक, 07 सहायक लेखा परीक्षक, 01 कर निर्धारण अधिकारी, 11 कर निरीक्षक श्रेणी-1, 01 कार्यालय अधीक्षक(के0), तथा 06 प्रधान लिपिक का पद रिक्त है।

 

बिन्दु-10 अपने प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी द्वारा प्राप्त मासिक पारिश्रमिक जिसमें उसके विनियमों और यथाउपबंधित प्रतिकर की प्रणाली सम्मिलित हैः-
पंचम वेतन आयोग की संस्तुति के क्रम में शासन द्वारा निर्धारित वेतनमान में विभिन्न संवर्गों के अधिकारियों / कर्मचारियों का वेतन का भुगतान किया जाता है जिसमें नगर आयुक्त का वेतनमान 14300-18300 / -, अपर नगर आयुक्त, मुख्य अभियन्ता का वेतनमान 12000-16500 / -, मुख्य नगर लेखा परीक्षक, उप नगर आयुक्त, अधिशाासी अभियन्ता का वेतनमान 10000-15200 / -, सहायक नगर आयुक्त, लेखाधिकारी, सहायक अभियन्ता, चिकित्साधिकारी का वेतनमान 8000-13500 / - है, अवर अभियन्ता, स्वास्थ्य निरीक्षक का वेतनमान-4500-7000 / - है। नगर निगम, वाराणसी द्वारा वर्तमान में नगर निगम में तैनात कर्मियों का वेतन मद में लगभग रु0 300 लाख प्रतिमाह वितरित किया जाता है। वेतन का भुगतान बैंक में चेक के माध्यम से किया जाता है।
 

 

बिन्दु-11 सभी योजनाओं प्रस्तावित व्ययों और किये गये समवितरणों पर रिपोटों की विशिष्टियाँ उपदर्शित करते हुए अपने प्रत्येक अभिकरण को आवंटित बजटः-
नगर निगम वाराणसी का वर्ष 2007-08 हेतु निम्नवत् बजट पारित किया गया-
1. प्रारम्भिक अवशेष - 12,23,80,042
2. वर्ष में अनुमानित आय - 1,35,77,99,001
3. कुल अनुमानित आय - 1,48,01,79,043
4. कुल अनुमानित व्यय - 1,26,81,68,501
4. अन्तिम अवशेष - 21,20,10,542
 

 

बिन्दु-12 सहायिकी कार्यक्रमों के निष्पादन की रीति जिसमें आवंटित राशि और ऐसे कार्यक्रमों के फायदाग्राहियों के व्यौरें सम्मिलित हैं:-
74वें संविधान संशोधन में विहित प्राविधानों के अन्तर्गत स्थानीय निकायों के लिए पृथक राज्य वित्त आयोग का गठन किया गया, जिसकी संस्तुति के क्रम में स्थानीय निकायों को राज्य सरकार को प्राप्त होने वाले राजस्व का निश्चित अंश संक्रमित किया जाने लगा है। नगर निगम वाराणसी को वर्ष 2007-08 हेतु राज्य वित्त आयोग की संस्तुति के अधीन रु0 45 करोड़ 30 लाख प्राप्त होना संभावित है। राज्य वित्त आयोग से संस्तुतियों के अन्तर्गत इस नगर निगम को संक्रमित होने वाली धनराशि मुख्य रूप से नियमित कर्मचारियों के वेतन मद पर व्यय की जाती है। शेष धनराशि नगर निगम सदन द्वारा पारित संकल्पों के अनुसार विकास कार्यों पर व्यय की जाती है। राज्य वित्त आयोग के संस्तुति लागू होने के उपरान्त राज्य सरकार से किसी अन्य प्रकार का अनुदान प्राप्त नहीं होता है। बारहवें वित्त आयोग के अन्तर्गत स्थानीय निकायों को भारत सरकार से धनराशि अनुदान के रूप में प्रतिवर्ष स्वीकृत किया जाता है। बारहवें वित्त आयोग के अन्तर्गत आवंटित धनराशि व्यय की स्वीकृति नगर निगम अधिनियम में दिये गये प्राविधानों के अनुसार प्राप्त कर की जाती है। वर्ष 2005-06 हेतु रु0 322.60 लाख एवं वर्ष 2006-07 हेतु रु0 322.60 लाख स्वीकृत किया गया है। नगर निगम सीमान्तर्गत अचल सम्पत्तियों के हस्तान्तरण विलेखों पर जिला निबंधक द्वारा वसूल किया जाने वाले 2 प्रतिशत अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी का एक तिहाई हिस्सा नगर निगम को प्राप्त होता है, जिसे नगरीय अवस्थापना सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर व्यय किया जाता है। इस धनराशि को भी मण्डलायुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति से औपचारिक स्वीकृति प्राप्त होने के बाद व्यय किया जाता है।

 

बिन्दु-13 अपने द्वारा अनुदत्त रियायतों, अनुज्ञा-पत्रों या प्रधिकारों के प्राप्तिकर्ताओं की विशिष्टियाँ:-
नगर निगम अधिनियम के तहत किसी रियायत का प्रावधान नहीं है और न ही किसी प्रकार का कोई अधिकार प्राप्तकर्ता को दिया जाता है। नगर निगम सीमा में रिक्शों, रिक्शा ट्राली, ठेला, बैलगाड़ी, ताँगा, नाव, मोटरबोट, ज्वलनशील पदार्थों, लाउडस्पीकर, पशुओं / दुधारू पशुओं, वधशालाओं, बकरा एवं भैसा माँस की दुकानों, होटलों, लाजों, बारात घर, गेस्ट हाउस, आटो रिक्शा इत्यादि को निर्धारित लाइसेन्स शुल्क जमा कराकर अनुज्ञा-पत्र जारी किया जाता है।

 

बिन्दु-14 किसी इलेक्ट्रानिक रूप में सूचना के सम्बन्ध में व्यौरे, जो उसको उपलब्ध हो या उसके द्वारा धारित होः-

नगर निगम वाराणसी में कर्मचारियों के वेतन, पेंशन का कम्प्यूटराइजेशन किया जा चुका है। नगर निगम के गृहकर का डाटाबेस तैयार है। भौगोलिक सूचना तंत्र (जी0आई0एस) के माध्यम से सम्पत्ति कर सहित विभिन्न प्रकार के डाटाबेस तैयार कर उसे इलेक्ट्रानिक्स माध्यम पर उपलब्ध कराने की कार्यवाही प्रारम्भ करा दिया गया है।

 

बिन्दु-15 सूचना अभिप्राप्त करने के लिए नागरिकों को उपलब्ध सुविधाओं की विशिष्टियाँ, जिनके अन्तर्गत किसी पुस्तकालय या वाचनकक्ष के यदि लोक उपयोग के लिए अनुरक्षित हैं तो कार्यकरण घण्टें सम्मिलित हैं:-

वर्तमान में नगर निगम वाराणसी में नागरिकों के आवेदन करने पर अभिलेखों का नकल निर्धारित शुल्क जमा करा कर उपलब्ध कराने की व्यवस्था है, जिसमें मुख्य रूप से दाखिल खारिज, कर निर्धारण तथा जन्म मृत्यु प्रमाण-पत्र सम्बन्धी सूचनाएं उपलब्ध करायी जाती हैं।

 

बिन्दु-16 लोक सूचना अधिकारियों के नाम, पदनाम और अन्य विशिष्टियाँ:-
शासन द्वारा जनसूचना अधिकारी के रूप में नगर आयुक्त को नामित किया गया है।

 

बिन्दु-17 ऐसी अन्य सूचना जो विहित की जाय, प्रकाशित करेगा ओर तत्पश्चात इन प्रकाशनों को प्रत्येक वर्ष में अद्यतन करेगाः-

प्रपत्र

विभाग का नामः- नगर निगम, वाराणसी

क्र0सं0

लोक प्राधिकरण अर्थात शासन के विभाग निदेशालय / अधीनस्थ कार्यालय /  निगम /  उपक्रम /  संस्था /  बोर्ड /  आयोग आदि का नाम

जन सूचनाधिकारी /  सहायक जन सूचनाधिकारी का पदनाम व पता

दूरभाष कार्यालय

  अपीलीय अधिकारी का पदनाम 
व पता

दूरभाष कार्यालय

1

नगर निगम, वाराणसी

1  जन सूचना अधिकारी-
अपर नगर आयुक्त,

सहायक जन सूचना अधिकारी-
1. उप नगर आयुक्त,
2. सहायक नगर आयुक्त,
3. मुख्य अभियन्ता,
4. नगर स्वास्थ्य अधिकारी, 
5. मुख्य नगर लेखा परीक्षक,
6. लेखाधिकारी, 
7. राजस्व अधीक्षक

 

 

2221505 

नगर आयुक्त,
नगर निगम, वाराणसी

2221702
2221711